खुश जिंदगी, खुशी जहान

जिंदगी का असली मतलब खुशियों में ही होता है। चाहे पैसे की कमी हो और जीवन पूरी तरह से खुश हो तो दुनिया की किसी और चीज की जरूरत नहीं पड़ती।

अच्छी हेल्थ है तो खुशियां तमाम है

अगर भोजन में अच्छे पोषक तत्वों वाली चीजों का उपयोग किया जाएगा तो शरीर स्वस्थ रहता है। स्वस्थ रहने से बड़ी दुनिया की कोई खुसी नहीं है।

नपुंसकता से डरें नहीं हमारे एक्सपर्ट की राय लें

स्तंभन दोष (ईडी) (नपुंसकता या इरेक्टाइल डिसफंक्शन एक ऐसी समस्या है जो शारीरिक रूप से अंतरंग संबंध बनाने के दौरान आपको आती है। जब ऐसा होता है तो रिश्ते में दरार आ सकती है। स्तंभन दोष पुरुषों के लिए एक बहुत ही तनावपूर्ण स्थिति है।

सगे सम्बन्धियों से हो गया है प्यार, हमारे एक्सपर्ट करेंगे उद्धार

अगर आपको भी अपने किसी सगे सम्बन्धी से प्यार हो गया है या हालात ज्यादा नाजुक है तो हमारे ईमेल पर लिख भेजें अपनी समस्या। हमारे एक्सपर्ट देंगे सही राय। आपकी जानकारी भी रखी जाएगी गोपनीय।

असफलताओं से न हो निराश, हमारे एक्सपर्ट करेंगे नैया पार

अगर आप भी बार -बार असफल हो रहे हैं तो निराश न हो हमारे एक्सपर्ट आपकी फ्री में मदद करने के लिए तैयार हैं। आप अपनी समस्या ईमेल पर लिख भेजे और फिर इसके बाद असफल;असफलायें आप से दूर भागने लगेंगीं।

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Tuesday, 17 October 2017

दीवाली के दिन अगर इन जगहों पर नहीं जलाया दीपक तो एक साल में हो जायेंगे कंगाल



दीवाली के दिन अगर इन जगहों पर नहीं जलाया दीपक तो एक साल में हो जायेंगे कंगाल 

दिवाली का त्योहार कार्तिक माह की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। भारत में दिवाली हिंदुओं का बहुत बड़ा त्योहार होता है। बता दें कि दिवाली को दीपावली के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म की यह मान्यता है कि दिवाली की रात में जब दीपों से सजी हुर्ई होती है तो तब लक्ष्मी जी भ्रमण करने के लिए बाहर निकलती हैं। उस समय लक्ष्मी जी अपने भक्तों को खुशियां देती हैं।
दिवाली का यह पर्र्व 5 दिन का होता है। धनतेरस, नरक चतुर्दशी, अमावास्या, कार्तिक शुक्ल और भार्ई दूज यह सब मानए जाते हैं इन 5 दिनों के पर्व में। यह पर्व धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज पर खत्म होते हैं। हर साल हिंदू कैलेंडर के मुताबिक दिवाली का त्योहार आता है। और उसकी तारीख हिंदू कैलेंडर में बनी होती है। बता दें कि दिवाली का यह पर्व अक्टूबर या नवंबर के महीने में ही आता है।
दिवाली का त्योहार क्यों मानया जाता है

हिंदू धर्म में दिवाली से जुड़ी एक सबसे लोकप्रिय कथा है। वह कथा है राजा राम की। रावण सीता मिया का अपहरण कर लेता है। और असुर रावण को मारने के बाद चौदह साल के वनवास को बीताने के बाद राम अयोध्या लौटते हैं। राम के अयोध्या में लौटने की खुशी में लोगों ने पूरी अयोध्या नगरी को दीपों से रौशन कर दिया होता है। यही वजह होती है कि उस दिन से दिवाली का त्योहार मनाया जाता है और यह पर्व बहुत रौशनी का प्रतीक भी माना जाता है।
दिवाली के दिन पीपल के पेड़ के नीचे एक दिया अवश्य लगाना चाहिए। मान्यता अनुसार पीपल के पेड़ में देवताओं का वास होता है इसलिए यहां दीपक जलाना शुभ माना जाता है। कहते हैं कि दिवाली के दिन मां लक्ष्मी का आगमन घरों में होता है। इसलिए दिया लगाते वक़्त व्यक्ति को घर के मुख्य दरवाज़े के दोनों ओर दिया ज़रूर जलाना चाहिए।

यदि आपके घर के आस-पास कोई मंदिर है तो दिवाली के दिन वहां भी जाकर एक दिया ज़रूर जलाना चाहिए। ऐसा करने पर पूरे साल मां लक्ष्मी की कृपा आप पर बनी रहती है।
यदि आपके घर के आस-पास कोई सुनसान जगह है तो वहां भी जाकर एक दीपक अवश्य लगायें। संभव हो तो यह दिया किसी चौराहे पर लगायें।
यदि आपके घर में आंगन है तो वहां भी दिया जलाना न भूलें। घर के आंगन में दिया अवश्य जलाना चाहिए। आंगन में दिया जलाने से आपका दुर्भाग्य आपसे कोसों दूर चला जाएगा और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद आप पर बना रहेगा। घर के आंगन में एक बड़ा दिया जलाएं और उसमें रात भर घी डालते रहें।

अगर दीवाली से पहले कर लिये ये काम तो पूरे साल बरसती रहेगी लक्ष्मी




अगर दीवाली से पहले कर लिये ये काम तो पूरे साल बरसती रहेगी लक्ष्मी 

कल  दीवाली के शुभ त्यौहार का आगाज होने वाला है। देवी लक्ष्मी को अपने घर में स्थाई रूप से रोकने के लिए यह दिन खास महत्व रखता है। शास्त्रों के अनुसार कुछ ऐसे काम हैं जिन्हें दीपावली से पहले कर लिया जाए तो सारा साल भरे रहेंगे धन के भंडार।
वास्तुशास्त्री भी मानते हैं की घर में साफ-सफाई का पूरा लाभ तभी मिलेगा जब आप इन चीजों को घर से बाहर कर देंगे। तो आईए जानें क्या हैं वह चीजें।
घर को पैंट करवा लें,  टूटे हुए प्लास्टर और फटी दीवार की भी मरम्मत करवाएं।
 शास्त्रों के अनुसार महालक्ष्मी उसी घर में वास करती हैं, जहां किसी भी तरह का उधार या कर्ज न हो। दीवाली से पहले इन्हें अवश्य चुका लें।
घर का कोई शीशा टूट गया है या धुंधला हो गया है तो उसे बदल लें। इससे घर में नकारात्मकता फैलती है। सकारात्मकता का प्रवेश रूकता है।

पुराने बूट, जूते और चप्‍पलें जो आप नहीं पहनते या टूटे हुए हैं उन्हें घर में न रखें।
अक्सर लोग घर की सीढ़‌ियों के नीचे व्यर्थ का सामान रख देते हैं जो उपयोग में नहीं आता। ऐसा करने से जगह तो रूकती ही है साथ ही सारे घर में नकारात्मक ऊर्जा फैलती रहती है।
 बंद पड़ी घड़ी में बैटरी डालें या उसे घर में न रखें। बंद पड़ी घड़ी घर में वृद्धि नहीं होने देती।
 घर में कोई भी बिजली से चलने वाला उपकरण खराब पड़ा है तो उसकी मुरम्मत करवाएं। अगर उपयोग लायक न हो तो उसे बेच दें। खराब उपकरण घर में बहुत सारी परेशानियों को जन्म देते हैं।
 देवी-देवताओं की खण्डित मूर्त‌ियां, फटी तस्वीरें या ग्रंथ व‌िसर्ज‌ित कर दें। दिवाली के दिन नई मूर्त‌ियां, तस्वीरें और ग्रंथ घर में स्थापित करें।
 तनाव और परेशानी से बचने के लिए घर की छत पर कबाड़ इकट्ठा करके रखा है तो बेच दें।
  टूटे-फूटे पुराने बर्तन अथवा ज‌िन बर्तनों को आप उपयोग में नहीं लाते उन्हें घर में न रखें।
  घर का पुराना सामान जैसे कपड़े, ख‌िलौने आदि किसी जरुरतमंद को दे दें।

Tuesday, 19 September 2017

कलयुग में सिर्फ इस देवता में है शक्ति जो मुर्दे को भी कर सकता है जिन्दा


कलयुग में सिर्फ इस देवता में है शक्ति जो मुर्दे को भी कर सकता है जिन्दा 

हेल्प इंडिया। दोस्तों मै आपको एक ऐसे देवता के बारे में बताने जा रहा हूँ ,जो कलयुग में भी ज़िंदा है और उसमे मरे हुए आदमी को भी ज़िंदा करने की शक्ती है। मै समझ रहा हूँ कुछ लोग तो जान भी गए भी होंगे,कि मैं किसके बारे में बात कर रहा हूँ।

कुछ लोग ऐसे भी होंगे जो इस नाम से परिचित भे नहीं होंगे। चलिए मैं आप को बताता हूँ, मै बात कर रहा हूँ महा योगी शिवअवतारी गुरु गोरख नाथ महाराज के बारे मैं। गोरख नाथ द्वारा मृत संजीवनी विद्या थी,जिसकी उन्होंने सिद्धी प्राप्त की थी। जिसके कारण वह किसी भी मृत व्यक्ति को जीवित कर सकते थे।

कई पुस्तकों और कहानियों में सुनने को मिलता है कि इन्होने अपने कई शिष्यों को अपनी इस विद्या के माध्यम से जीवीत किया। इनकी पूजा करने से भी सभी मनोंकामनाएं पूरी होतीं हैं। गोरखनाथ का प्रसिद्द मंदिर गोरखपुर और हनुमानगढ़ जिले में गोरख टीले के नाम से काफी मशहूर है। लाखों की संख्या में भक्त इनके दर्शन करने जाते हैं। इनकी पूजा बहुत ही साधारण होती है ,इसमें बहुत सामान्य चीजों का ही प्रयोग होता है। इनके प्रसन्न होने पर ये आपकी हर मनोकामना को पूरा करते है। 

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Sunday, 17 September 2017

इस देवता की पूजा करने से होती हैं १०० प्रतिशत कठिन से कठिन सभी मनोकामनाएं पूरी

इस देवता की पूजा करने से होती हैं १०० प्रतिशत कठिन से कठिन सभी मनोकामनाएं पूरी  

हेल्प इंडिया। दोस्तों आज मै एक धार्मिक लेख लिख रहा हूँ ,वैसे मै बहुत बड़ा धार्मिक व्यक्ति नहीं हूँ ,मगर कुछ नियम कर्म है उन्हें पूरा जरूर करता हूँ।

 दोस्तों आज मै जो बात आपको बताने जा रहा हूँ ये किसी किताब में नहीं है। यह मेरा प्रयोग है और जिन लोगों ने इसे किया उन लोगों के साथ जो भी हुआ एकदम सत्य है। मै आज आपको बाबा जाहर वीर के बारे में बताने जा रहा हूँ। बहुत से लोग ऐसे भी होंगे जो इनको अच्छी तरह से जानते होंगे और कुछ लोग पहली बार यह नाम सुन रहे होंगे। बाबा जाहर वीर को हिन्दू और मुस्लिम दोनों लोग मानते हैं।

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हिन्दू जहाँ इन्हें जाहर वीर नाम से बुलाते हैं बहीं मुस्लिम लोग जाहर पीर के नाम से बुलाते है। गोगा वीर अथवा गोगा पीर भी इन्हीं के नाम हैं। ददरेवा, जो राजस्थान के चुरू जिले की राजगढ़ तहसील में स्थित है। यहीं पर इनका जन्म हुआ था। हनुमानगढ़ जिले के गोगामेडी गांव में गोगाजी का समाधि स्थल है, जहां हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही धर्मों के लोग आकर पूजा और अर्चना करतें हैं। गोगाजी जी महाराज की माता वाछल गुरु गोरख नाथ की भ्हक्त थीं। इसी कारण गोगाजी जी महाराज भी गोरख नाथ के महान भक्त बन गए। गोगा जी महाराज अपने घोड़े सहित गोगामेडी में जमीन में समा गए थे।

 लोगों का कहना है कि वो आज भी जिन्दा हैं ,और भादव नौवीं को अपने जन्म के दिन अपने गाँव ददरेवा आते है। गोगामेडी बहुत ही रमणीय स्थान है। यहाँ एक मेला भी लगता है जिसमे लाखों की संख्या में श्रद्धालू आते है। दोस्तों जहाँ तक मेरा विस्वाश है कि गोगा जी की पूजा करने से हर असंभव काम संभव हो जाता हैं। इनकी पूजा में आप जितनी ही श्रद्धा लगायेंगे उतना ही फल पायेंगे। इनकी पूजा करने से कोई काम असंभव नहीं होता।

Tuesday, 15 August 2017

एक त्रिपाल और टीन शेड में विराजमान भगवान जाने क्या है सच्चाई



हेल्प इंडिया ।दोस्तों भगवान राम के मंदिर देश में ज्यादा नही दिखते। जो भी हैं आप उंगलियों पर गिन सकते हैं। ऐसे में अगर तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो शिव जी, हनुमान जी के मंदिर ज्यादा दिखते हैं। अगर ऐतिहासिक महत्व रखने वाले राम मंदिर ढूंढे जाएं तो शायद पांच दस मंडोर ऐसे मिलेंगे जो हजार दो हजार साल पुराने होंगे। ऐसे में रामजन्मभूमि में विराजमान राम लला के दर्शन करके बहुत अच्छा लगा। अपने ही देश में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम एक त्रिपाल और टीन के शेड में विराजमान हैं, ये देश का और समाज का दोनों का दुर्भाग्य है। उम्मीद क्या करें, मामला विवादित है इसलिए पोस्ट करते समय भी शब्दों की मर्यादा का ध्यान रखना पड़ रहा है। लेकिन रामलला विराजमान हैं, ये एहसास दिल को सुकून देता है। पूजा अर्चना होती है। दर्शन हालांकि दूर से करने पड़ते हैं। सुरक्षा के पुख्ता इंतेजाम किये गए हैं। मोबाइल, सिम कार्ड या रिमोट वाली चाबी नही ले जा सकते। चलो प्रथम बार श्री राम जन्मभूमि का ये टूर दोस्तों के साथ यादगार रहा।

Thursday, 27 July 2017

नागपंचमी के दिन क्यों करते है सांपों की पूजा आईए जानते है पूरा इतिहास


नागपंचमी के दिन क्यों करते है सांपों की पूजा आईए जानते है पूरा इतिहास 

नाग पंचमी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। हिन्दू पंचांग के अनुसार सावन माह की शुक्ल पक्ष के पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता या सर्प की पूजा की जाती है और उन्हें दूध से स्नान कराया जाता है। लेकिन कहीं-कहीं दूध पिलाने की परम्परा चल पड़ी है। नाग को दूध पिलाने से पाचन नहीं हो पाने या प्रत्यूर्जता से उनकी मृत्यु हो जाती है। शास्त्रों में नागों को दूध पिलाने को नहीं बल्कि दूध से स्नान कराने को कहा गया है।
नागपंचमी के ही दिन अनेकों गांव व कस्बों में कुश्ती का आयोजन होता है जिसमें आसपास के पहलवान भाग लेते हैं। गाय, बैल आदि पशुओं को इस दिन नदी, तालाब में ले जाकर नहलाया जाता है। इस दिन अष्टनागों की पूजा की जाती है।-
वासुकिः तक्षकश्चैव कालियो मणिभद्रकः।
ऐरावतो धृतराष्ट्रः कार्कोटकधनञ्जयौ ॥
एतेऽभयं प्रयच्छन्ति प्राणिनां प्राणजीविनाम् ॥ (भविष्योत्तरपुराण – 32 -2 -7 )
(अर्थ: वासुकि, तक्षक, कालिया, मणिभद्रक, ऐरावत, धृतराष्ट्र, कार्कोटक और धनञ्जय - ये प्राणियों को अभय प्रदान करते हैं।)आज के पावन प्पर्व पर वाराणसी ( काशी) में नाग कुआँ ननामक स्थान पर बहुत बड़ा मेला लगता है,किम्वदन्ति है कि इस स्थान पर तक्षक गरूण जी के भय से वालक रूप में काशी संस्कृत की शिक्षा लेने हेतु आये,परन्तु गरूण जी को इसकी जानकारी हो गयी,और उन्होनें तक्षक पर हमला कर दिया,परन्तु अपने गुरू जी के प्रभाव से गरूण जी ने तक्षक नाग को अभय दान कर दिया, उसी समय से यहाँ नाग पंचमी के दिन से यहाँ नाग पूजा की जाती है,यह मान्यता है,कि जो भी नाग पंचमी के दिन यहाँ पूजा अर्चना कर नाग कुआँ का दर्शन करता है,उसके कुन्डलि से सर्प दोष का निवारण हो जाता है ।
संस्कृति
हिन्दू संस्कृति ने पशु-पक्षी, वृक्ष-वनस्पति सबके साथ आत्मीय संबंध जोड़ने का प्रयत्न किया है। हमारे यहां गाय की पूजा होती है। कई बहनें कोकिला-व्रत करती हैं। कोयल के दर्शन हो अथवा उसका स्वर कान पर पड़े तब ही भोजन लेना, ऐसा यह व्रत है। हमारे यहाँ वृषभोत्सव के दिन बैल का पूजन किया जाता है। वट-सावित्री जैसे व्रत में बरगद की पूजा होती है, परन्तु नाग पंचमी जैसे दिन नाग का पूजन जब हम करते हैं, तब तो हमारी संस्कृति की विशिष्टता पराकाष्टा पर पहुंच जाती है।गाय, बैल, कोयल इत्यादि का पूजन करके उनके साथ आत्मीयता साधने का हम प्रयत्न करते हैं, क्योंकि वे उपयोगी हैं। लेकिन नाग हमारे किस उपयोग में आता है, उल्टे यदि काटे तो जान लिए बिना न रहे। हम सब उससे डरते हैं। नाग के इस डर से नागपूजा शुरू हुई होगी, ऐसा कई लोग मानते हैं, परन्तु यह मान्यता हमारी संस्कृति से सुसंगत नहीं लगती। नाग को देव के रूप में स्वीकार करने में आर्यों के हृदय की विशालता का हमें दर्शन होता है। 'कृण्वन्तो विश्वमार्यम्‌' इस गर्जना के साथ आगे बढ़ते हुए आर्यों को भिन्न-भिन्न उपासना करते हुए अनेक समूहों के संपर्क में आना पड़ा। वेदों के प्रभावी विचार उनके पास पहुँचाने के लिए आर्यों को अत्यधिक परिश्रम करना पड़ा।विभिन्न समूहों को उपासना विधि में रहे फर्क के कारण होने वाले विवाद को यदि निकाल दिया जाए तो मानव मात्र वेदों के तेजस्वी और भव्य विचारों को स्वीकार करेगा, इस पर आर्यों की अखण्ड श्रद्धा थी। इसको सफल बनाने के लिए आर्यों ने अलग-अलग पुंजों में चलती विभिन्न देवताओं की पूजा को स्वीकार किया और अलग-अलग पुंजों को उन्होंने आत्मसात करके अपने में मिला लिया। इन विभिन्न पूजाओं को स्वीकार करने के कारण ही हमें नागपूजा प्राप्त हुई होगी, ऐसा लगता है।
भारत वर्ष में सर्प पूजन
भारत देश कृषिप्रधान देश था और है। सांप खेतों का रक्षण करता है, इसलिए उसे क्षेत्रपाल कहते हैं। जीव-जंतु, चूहे आदि जो फसल को नुकसान करने वाले तत्व हैं, उनका नाश करके सांप हमारे खेतों को हराभरा रखता है।
साँप हमें कई मूक संदेश भी देता है। साँप के गुण देखने की हमारे पास गुणग्राही और शुभग्राही दृष्टि होनी चाहिए। भगवान दत्तात्रय की ऐसी शुभ दृष्टि थी, इसलिए ही उन्हें प्रत्येक वस्तु से कुछ न कुछ सीख मिली।
साँप सामान्यतया किसी को अकारण नहीं काटता। उसे परेशान करने वाले को या छेड़ने वालों को ही वह डंसता है। साँप भी प्रभु का सर्जन है, वह यदि नुकसान किए बिना सरलता से जाता हो, या निरुपद्रवी बनकर जीता हो तो उसे मारने का हमें कोई अधिकार नहीं है। जब हम उसके प्राण लेने का प्रयत्न करते हैं, तब अपने प्राण बचाने के लिए या अपना जीवन टिकाने के लिए यदि वह हमें डँस दे तो उसे दुष्ट कैसे कहा जा सकता है? हमारे प्राण लेने वालों के प्राण लेने का प्रयत्न क्या हम नहीं करते।
साँप को सुगंध बहुत ही भाती है। चंपा के पौधे को लिपटकर वह रहता है या तो चंदन के वृक्ष पर वह निवास करता है। केवड़े के वन में भी वह फिरता रहता है। उसे सुगंध प्रिय लगती है, इसलिए भारतीय संस्कृति को वह प्रिय है। प्रत्येक मानव को जीवन में सद्गुणों की सुगंध आती है, सुविचारों की सुवास आती है, वह सुवास हमें प्रिय होनी चाहिए।
हम जानते हैं कि साँप बिना कारण किसी को नहीं काटता। वर्षों परिश्रम संचित शक्ति यानी जहर वह किसी को यों ही काटकर व्यर्थ खो देना नहीं चाहता। हम भी जीवन में कुछ तप करेंगे तो उससे हमें भी शक्ति पैदा होगी। यह शक्ति किसी पर गुस्सा करने में, निर्बलों को हैरान करने में या अशक्तों को दुःख देने में व्यर्थ न कर उस शक्ति को हमारा विकास करने में, दूसरे असमर्थों को समर्थ बनाने में, निर्बलों को सबल बनाने में खर्च करें, यही अपेक्षित है।
सर्प मणि
कुछ दैवी साँपों के मस्तिष्क पर मणि होती है। मणि अमूल्य होती है। हमें भी जीवन में अमूल्य वस्तुओं को (बातों को) मस्तिष्क पर चढ़ाना चाहिए। समाज के मुकुटमणि जैसे महापुरुषों का स्थान हमारे मस्तिष्क पर होना चाहिए। हमें प्रेम से उनकी पालकी उठानी चाहिए और उनके विचारों के अनुसार हमारे जीवन का निर्माण करने का अहर्निश प्रयत्न करना चाहिए। सर्व विद्याओं में मणिरूप जो अध्यात्म विद्या है, उसके लिए हमारे जीवन में अनोखा आकर्षण होना चाहिए। आत्मविकास में सहायक न हो, उस ज्ञान को ज्ञान कैसे कहा जा सकता है?साँप बिल में रहता है और अधिकांशतः एकान्त का सेवन करता है। इसलिए मुमुक्षु को जनसमूह को टालना चाहिए। इस बारे में साँप का उदाहरण दिया जाता है।देव-दानवों द्वारा किए गए समुद्र मंथन में साधन रूप बनकर वासुकी नाग ने दुर्जनों के लिए भी प्रभु कार्य में निमित्त बनने का मार्ग खुला कर दिया है। दुर्जन मानव भी यदि सच्चे मार्ग पर आए तो वह सांस्कृतिक कार्य में अपना बहुत बड़ा योग दे सकता है और दुर्बलता सतत खटकती रहने पर ऐसे मानव को अपने किए हुए सत्कार्य के लिए ज्यादा घमंड भी निर्माण नहीं होगा।दुर्जन भी यदि भगवद् कार्य में जुड़ जाए तो प्रभु भी उसको स्वीकार करते हैं, इस बात का समर्थन शिव ने साँप को अपने गले में रखकर और विष्णु ने शेष-शयन करके किया है।समग्र सृष्टि के हित के लिए बरसते बरसात के कारण निर्वासित हुआ साँप जब हमारे घर में अतिथि बनकर आता है तब उसे आश्रय देकर कृतज्ञ बुद्धि से उसका पूजन करना हमारा कर्त्तव्य हो जाता है। इस तरह नाग पंचमी का उत्सव श्रावण महीने में ही रखकर हमारे ऋषियों ने बहुत ही औचित्य दिखाया है।

Friday, 9 June 2017

आज भी हवस का शिकार होने की मजबूरी ये कहानी है देवदासियों की


फोटो सोर्स -अमर उजाला 

आज भी हवस का शिकार होने की मजबूरी ये कहानी है देवदासियों की 


देवदासी प्रथा कहते ही आपके मन में आती हैं वो महिलाएं जो धर्म के नाम पर दान कर दी गईं और फिर उनका जीवन धर्म और शारीरिक शोषण के बीच जूझता रहा.
लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये घिनौनी प्रथा आज भी जारी है.
आंध्र प्रदेश की लक्ष्मम्मा अधेड़ उम्र की हैं और उनके मां-बाप ने भी उन्हें मंदिर को देवदासी बनाने के लिए दान कर दिया.
अपनी समस्याओं के लेकर हैदराबाद में 500 देवदासियां एक जन सुनवाई में एकत्र हुई.

इसकी वजह लक्ष्मम्मा कुछ यू बयां करती हैं,"मेरे माता-पिता की तीनों संतानें लड़कियां थीं. दो लड़कियों की तो उन्होंने शादी कर दी लेकिन मुझे देवदासी बना दिया ताकि मैं उनके बुढ़ापे का सहारा बन सकूं.”
आज भी आंध्र प्रदेश में, विशेषकर तेलंगाना क्षेत्र में दलित महिलाओं को देवदासी बनाने या देवी देवताओं के नाम पर मंदिरों में छोड़े जाने की रस्म चल रही है.
लक्ष्मम्मा देवदासी होने की पीड़ा जानती हैं, वो प्रथा जिसमें उन्हें खुद उनके माता-पिता ने ढकेला था.

शारीरिक शोषण


ऐसे सारे बच्चों का डीएनए टेस्ट करवाया जाए ताकि उन के पिता का पता लग सके और उन की संपत्ति में इन बच्चों को भी हिस्सा मिल सके.
लक्ष्मम्मा, अध्यक्ष,पोराटा संघम
लक्ष्मम्मा मानती हैं कि उनका भी शारीरिक शोषण हुआ लेकिन वो अपना दर्द किसी के साथ बांटना नहीं चाहतीं.
देवदासियों की जन सुनवाई में शामिल और दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर विमला थोराट कहती हैं, "देवदासी बनी महिलाओं को इस बात का भी अधिकार नहीं रह जाता कि वो किसी की हवस का शिकार होने से इनकार कर सकें".
जिस शारीरिक शोषण के शिकार होने के सिर्फ जिक्र भर से रुह कांप जाती हैं, उस दिल दहला देने वाले शोषण को सामना ये देवदासियां हर दिन करती हैं.
ये दर्द इकलौती लक्ष्मम्मा का नहीं है, आंध्र प्रदेश में लगभग 30 हज़ार देवदासियां हैं जो धर्म के नाम पर शारीरिक शोषण का शिकार होती हैं.
लेकिन लक्ष्मम्मा बाकी देवदासियों की तरह बदकिस्मत नहीं थीं ना ही उनमें किसी हिम्मत की कमी थी.
जब लक्ष्मम्मा को मौका मिला तो न केवल वो उस व्यवस्था से निकल गईं बल्कि उसके खिलाफ संघर्ष में उठ खडी हुईं और आज वो इस व्यवस्था का शिकार बनने वाली महिलाओं के लिए आशा की एक किरण बन गई हैं.

देवदासियों का हाल

लक्ष्मम्मा उस पोराटा संघम की अध्यक्ष हैं जो देवदासी व्यवस्था के विरुद्ध सामाजिक जागरूकता लाने के लिए काम कर रही है.
ऐसे सारे बच्चों का डीएनए टेस्ट करवाया जाए ताकि उन के पिता का पता लग सके और उन की संपत्ति में इन बच्चों को भी हिस्सा मिल सके.
लक्ष्मम्मा, अध्यक्ष,पोराटा संघम

सभी लक्ष्मम्मा की तरह इस दलदल से नहीं निकल पातीं या कहें कि निकलने की हिम्मत नहीं कर पातीं.
निज़ामाबाद जिले की कट्टी पोसनी भी ऐसी ही एक महिला हैं.
कट्टी पोसनी कहती हैं "मेरी जो हालत है भगवान ना करे कि वो हालत किसी और की हो. मुझे केवल इसलिए देवदासी बनाया गया कि मेरा भाई बीमार रहता था. अब मैं इस से निकलना भी चाहूं तो नहीं निकल सकती क्योंकि अब मुझसे विवाह कौन करेगा और फिर मेरा स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रहेगा".
लक्ष्मम्मा और लगभग 500 देवदासियां हाल ही में हैदराबाद में हुई एक जनसुनवाई के लिए इकट्ठा हुईं, जहां देवदासियों के हाल पर चर्चा की गई.

देवदासी बनी महिलाओं को इस बात का भी अधिकार नहीं रह जाता की वो किसी की हवस का शिकार होने से इंकार कर सकें
विमला थोराट, प्रोफेसर दिल्ली विश्वविद्यालय

जनसुनवाई में देवदासी महिलाओं की समस्याओं पर भी चर्चा हुई जिसमें उन बच्चों का भी जिक्र आया जो इन नाजायज़ रिश्तों की पैदाइश हैं.

जन सुनवाई में अपनी बेटी के साथ मौजूद एक देवदासी

नाजायज़ बच्चों का हक

एक और देवदासी अशम्मा कहती हैं, "केवल महबूब नगर जिले में ऐसे रिश्तों से पैदा हुए पांच से दस हज़ार बच्चे हैं. पहले उनका सर्वे होना चाहिए. इन बच्चों के लिए विशेष स्कूल और हॉस्टल होने चाहिए और उन्हें नौकरी मिलनी चाहिए ताकि वो भी सम्मान के साथ जीवन बिता सकें.”
इससे भी एक कदम आगे बढ़कर लक्ष्मम्मा ने मांग उठाई, "ऐसे सारे बच्चों का डीएनए टेस्ट करवाया जाए ताकि उनके पिता का पता लग सके और उनकी संपत्ति में इन बच्चों को भी हिस्सा मिल सके."
लक्ष्मम्मा कहती हैं कि ऐसा करने से किसी पुरुष की देवदासी के नाम पर इन महिलाओं का शोषण करने की हिम्मत नहीं होगी.
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Thursday, 25 May 2017

सबसे अच्छा धर्म कौन ?


सबसे अच्छा धर्म कौन ?

209139:एक हिंदू प्रश्न कर रहा है कि : कौनसा धर्म बेहतर है, हिंदू धर्म या इस्लाम, और क्यों?
मैं हिंद महासागर के एक देश मॉरीशस का रहनेवाला हूँ। कृपया मुझे बतलाएं कि सबसे अच्छा धर्म कौनसा है, हिंदू धर्म या इस्लाम और क्यों?मैं स्वयं एक हिंदू हूँ।
Published Date: 2016-04-19
उत्तरः

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह के लिए योग्य है।

सबसे अच्छा धर्म वह धर्म है जो यह प्रमाणित करने की क्षमता रखता हो कि वही वह धर्म है जिसे सृष्टिकर्ता अल्लाह सर्वशक्तिमान पसंद करता है, और उसे मानवता के लिए प्रकाश के तौर पर उतारा है, जो उन्हें उनके जीवन में सौभाग्य प्रदान करता है और उन्हें उनके परलोक के जीवन में मोक्ष प्रदान करेगा। तथा प्रमाण या सबूत के लिए ज़रूरी है कि वह उज्जवल और स्पष्ट हो, लोगों को उसमें कोई शक न हो, और लोगों के अंदर उसके समान चीज़ लाने की शक्ति और सामर्थ्य न हो। क्योंकि दज्जाल लोग अपने झूठ पर जो गिरे हुए और कमज़ोर प्रमाण प्रस्तुत करते हैं उन्हें अल्लाह सर्वशक्तिमान भली-भांति जानता है। इसलिए अल्लाह सर्वशक्तिमान ने अपने पैगंबरों और ईश्दूतों का व्यापक व समग्र चमत्कारों और प्रत्यक्ष लक्षणों द्वारा समर्थन करने का चयन किया जो लोगों के लिए इस व्यक्ति की सत्यता को प्रमाणित करते हैं जिसकी ओर उसके पालनहार की ओर से वह्य (ईश्वाणी) की गई है, चुनाँचे लोग उसमें विश्वास रखते हैं और उसका पालन करते हैं।

इस प्रकार इस्लाम के संदेष्टा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम प्रभावशाली व उज्जवल चमत्कारों के साथ आए, जो बहुत अधिक हैं जिनके बारे में बड़ी-बड़ी पुस्तकें लिखी गई हैं। लेकि उनमें सबसे महान और प्रधान दिव्य क़ुरआन है, जिसने अरबों को चुनौती दी है कि वे कोई ऐसी चीज़ लाकर दिखाएं जो पूर्णता के सभी पहलुओं में उसके समान हो। क्योंकि उसमें शब्दाडंबरपूर्ण (आलंकारिक) चमत्कार पाया जाता है, चुनाँचे क़ुरैश के वाक्पटु सुवक्ता - जबकि वे सभी इतिहासकारों की गवाही के अनुसार वाग्मिता और सुभाषण के शिखर पर पहुँचे हुए थे - इसके समान कोई चीज़ प्रस्तुत नहीं कर सके। तथा इसमें वैज्ञानिक चमत्कार भी है, चुनाँचे क़ुरआन करीम - इसी तरह नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सुन्नत - ऐसे वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित हैं जिस तरह की चीज़ें उस ज़माने में किसी मनुष्य के लिए प्रस्तुत करना संभव नहीं था सिवाय इसके कि उसकी ओर वह्य (ईश्वरीयवाणी) की जाती हो। तथा इसमें प्रोक्ष से संबंधित चमत्कार पाया जाता है, चुनाँचे क़ुरआन ने पहले और बाद में आनेवालों के इतिहास के बारे में बात किया है, जबकि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को इतिहास का पूर्वज्ञान नहीं था, बल्कि उस देश में कोई ऐसा व्यक्ति था ही नहीं जो वस्तुतः इसका ज्ञान रखता हो सिवाय अहले किताब (यानी यहूदियों व ईसाइयों) के कुछ अवशेष लोगों के। तथा इसमें विधायी चमत्कार भी है जो एक संपूर्ण और व्यापक प्रणाली में प्रकट होता है, जिसका आरंभ नैतिकता, व्यक्तिगत शिष्टाचार, परिवार और पर्सनल स्थिति के प्रावधानों से होता है। जो अंतर्राष्ट्रीय संबंधों और सामुदायिक प्रावधानों को संगठित करता है। जो मानव जाति के बीच न्याय और स्वतंत्रता के स्द्धिांतों की स्थापना करता है, तथा संसार, प्रोक्ष और परलोक के अवधारणाओं, और सौभाग्य और दुर्भाग्य के अवधारणाओं को प्रमाणित करता है। ये सारी चीज़ें एक निरक्षर आदमी से जारी होती हैं जो पढ़ना लिखना नहीं जानता है, लेकिन उसके दोस्तों से पहले उसके दुश्मन उसकी सच्चाई और अमानतदारी की गवाही देते हैं। वह इस क़ुरआन को ग्रहण करता है ताकि इसके द्वारा विशाल इस्लामी सभ्यता की स्थापना करे जिसका विस्तार चौदह सदी से अधिक समय तक रहता है।

हमारे विचार में सबसे अच्छा धर्म, वह धर्म है जो आप को केवल एक शक्ति से जोड़ता है, यह वही शक्ति है जिसने आपको पैदा किया और आपको अनुग्रह प्रदान किया है, और वह आकाशों और धरती की बागडोर का मालिक है। यह वही शक्ति है जो आपके दूसरे जीवन में आप पर दया करेगी और आपके साथ होगी यदि आप उसपर ईमान लाए और अच्छा काम किया। वह अल्लाह सर्वशक्तिमान है, जो एक, अकेला और बेनियाज़ (निस्पृह) है। और वह (धर्म) आपको उसके अलावा किसी अन्य से नहीं जोड़ता है, क्योंकि उसके अलावा हर चीज़ रचना, कमज़ोर और अल्लाह महिमावान की ज़रूरतमंद है। इस तरह मनुष्य सत्य अल्लाह के सिवाय गुलामी के समस्त बंधनों से मुक्त हो जाता है, तथा भूमि संपर्कों से छुटकारा पा जाता है जो कि मानवता के लिए अपमान, अत्याचार, उत्पीड़न और वर्चस्व के कारण बनते हैं। यह सब एक झूठे धर्म के नाम पर किया जाता है जो वर्ग व्यवस्था (वर्गभेद) को प्रमाणित करता है। (देखिए: डॉ. आज़मी की किताब ‘‘दिरासात’’ का अध्याय ‘‘हिन्दू समाज में वर्गीकरण’’), तथा अल्लाह सर्वशक्तिमान के अलावा की गुलामी को स्वीकार करता है, बल्कि जानवरों जैसे गाय इत्यादि की पूजा को स्वीकारता है। चुनाँचे वह मनुष्य जिसे अल्लाह ने बुद्धि और आत्मा से सम्मानित किया है जो अल्लाह सर्वशक्तिमान की आत्मा से है, उस चीज़ का बंदी बन जाता है जिसे वह उन जानवरों में से पवित्र, प्रतिष्ठित और सम्माननीय क़रार देता है, हालांकि वह उसके लिए लाभ और हानि के मालिक नहीं हैं, बल्कि स्वयं अपने लिए भी किसी चीज़ के मालिक नहीं, दूसरे की बात तो बहुत दूर है।
सबसे अच्छा धर्म वह है जो एक ऐसी संपूर्ण प्रणाली रखता है जो लोक और प्रलोक में खुशी व सौभाग्य के रास्तों की ओर मनुष्य का मार्गदर्शन करता है; क्योंकि धर्मों का उद्देश्य सौभाग्य की प्राप्ति है, और उसे अल्लाह सर्वशक्तिमान के मार्गदर्शन के बिना प्राप्त करना संभव नहीं है। और इस भरपूर सौभाग्य और सुख को प्राप्त करने के लिए, इस्लाम में आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक, पारिवारिक और मनोवैज्ञानिक पहलुओं में हर प्रकार का मार्गदर्शन पाया जाता है। जब मुसलमानों ने प्रथम युग में इस मार्गदर्शन को अपनाया, तो धरती को हर भलाई, न्याय और निष्पक्षता (इंसाफ) से भर दिया, और जब उन्हों ने इससे उपेक्षा किया तो उनसे वे लाभ छिन गए जो अल्लाह ने उन्हें प्रदानक किए थे।

सबसे अच्छा धर्म वह है जो कालानुक्रमिक क्रम में सबसे नवीनतम है, अपने से पूर्व सत्य धर्मों की पुष्टि करनेवाला, कुछ पूर्व विधानों को मंसूख करनेवाला है जो उसके फैलाव के समय और स्थान के अनुसार अवतरित हुए थे, तथा उन धर्मों में वर्णित शुभसूचनाओं को सुनिश्चित करनेवाला है, जो (शुभसूचनाएं) एक ऐसे ईश्दूत के बारे में सूचना देती हैं जो अंतिम काल में अवतरित होगा, और उसकी निशानियों और गुणों का वर्णन करती हैं। चुनाँचे क़ुरआन करीम ने हमें सूचना दी है कि सभी पूर्व ईश्दूत और पैगंबर इस बात को जानते थे कि अंतिम काल में एक पैगंबर भेजा जाएगा, जिसका नाम मुहम्मद है, अल्लाह सर्वशक्तिमान उस पर संदेशों का अंत कर देगा। अल्लाह तआला का फरमान है :

﴿وَإِذْ أَخَذَ اللَّهُ مِيثَاقَ النَّبِيِّينَ لَمَا آتَيْتُكُمْ مِنْ كِتَابٍ وَحِكْمَةٍ ثُمَّ جَاءَكُمْ رَسُولٌ مُصَدِّقٌ لِمَا مَعَكُمْ لَتُؤْمِنُنَّ بِهِ وَلَتَنْصُرُنَّهُ قَالَ أَأَقْرَرْتُمْ وَأَخَذْتُمْ عَلَى ذَلِكُمْ إِصْرِي قَالُوا أَقْرَرْنَا قَالَ فَاشْهَدُوا وَأَنَا مَعَكُمْ مِنَ الشَّاهِدِينَ﴾ [سورة آل عمران :81]

‘‘और याद करो जब अल्लाह तआला ने पैग़म्बरों से अहद व पैमान (वचन) लिया कि जो कुछ मैं तुम्हें किताब और हिकमत दूँ, फिर तुम्हारे पास वह पैग़म्बर आए जो तुम्हारे पास की चीज़ को सच्च बताए तो तुम अवश्य उस पर ईमान लाओगे और निश्चय ही उसकी सहायता करोगे। फरमाया : क्या तुम इसके इक़रारी हो और इस पर मेरा ज़िम्मा (वचन) ले रहे हो? सब ने कहा कि हमें स्वीकार है, फरमाया : तो अब गवाह रहो और स्वयं मैं भी तुम्हारे साथ गवाहों में हूँ।’’ (सुरत आल-इम्रान 3: 81)

यही कारण है कि हम पिछले धर्मों की अविकृत अवशेषों में इस पवित्र पैगंबर के बारे में स्पष्ट शुभसूचनाएं पाते हैं। चुनाँचे तौरात और इंजील इन शुभसूचनाओं से भरे हैं, लेकिन उन्हें यहाँ उल्लेख करने की आवश्यकता नहीं है। बल्कि हमारे लिए यहाँ महत्वपूर्ण हमारे ईश्दूत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के बारे में वह स्पष्ट शुभसूचनाएं और भविष्यवाणियाँ हैं जो हिुन्दू धर्म के पवित्र ग्रंथों में वर्णित हुई हैं। वह शुभसूचनाएं या भविष्यवाणियाँ आवश्यक रूप से इन सभी पुस्तकों की सत्यता और सुरक्षा का संकेत नहीं देती हैं, बल्कि उनमें प्रमाणित कुछ सच बातों को इंगित करती हैं, जो उन पैगंबरों और ईश्दूतों से उद्धृत हैं जो प्राचीन समय में भेजे गए थ।

इन ग्रंथों को आदरणीय डॉ. मुहम्मद ज़ियाउर्र रहमान आज़मी ने अपनी बहुमूल्य पुस्तक ‘‘दिरासात फिल यहूदिय्या वल मसीहिय्या व अदयानिल हिंद’’ (पृष्ठ 703-746) में उल्लेख किया है, विशेषकर डॉ. साहब हिंदुस्तान से संबंध रखते हैं और उन पुस्तकों को पढ़ने में महारत रखते हैं जिनका मेरे ज्ञान के अनुसार अभी तक अरबी भाषा में अनुवाद नहीं हुआ है।

1- ''उस समय ‘‘शम्भल’’ गांव [अर्थात शांति वाला नगर], में एक आदमी के पास जिसका नाम ''विष्णु व्यास’’ (अब्दुल्लाह यानी अल्लाह का दास), होगा और वह विनम्र हृदय वाला होगा, उसके घर (कल्कि) [पापों और गुनाहों का निवारक], पैदा होगा।’’ [भागवत पुराण], (2/18) .

यह बात सर्वज्ञात है कि हमारे ईश्दूत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पिता का नाम (अब्दुल्लाह) है, और क़ुरआन करीम में मक्का का नाम ‘‘अल-बलदुल अमीन’’ यानी शांति वाला शहर है।

2- ''(विष्णु व्यास) के घर उनकी पत्नी (सोमती) [सुरक्षा व शांतिवाली, आमिना]से (कल्कि) पैदा होगा।’’ (कल्कि पुराण 2/11).

यह बात भी सर्वज्ञात है कि हमारे ईश्दूत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की माँ का नाम आमिना बिन्त वहब है।

3- ''वह चाँद के प्रकट होने के बारवहें दिन एक ऐसे महीने में पैदा होगा जिसका नाम (माधवह) [अर्थात ऐसा महीना जो दिलों को प्रिय है और वह रबीअ (बसंत) का महीना] है।’’ (कल्कि पुराण 2/15).

पैगंबर की जीवनी की पुस्तकें आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के जन्म की तिथि के वर्णन से भरी पड़ी हैं, और वह रबीउल अव्वल की बारहवीं तारीख में है, यद्यपि इसमें मतभेद है।

4- ''(कल्कि) पाँच गुणों से विशिष्ट होगा :

1. (PRAGYA-प्रज्ञा) [भविष्य के बारे में सूचना देगा].

2. (CULINATA-कुलीनता) [अपनी जाति में सबसे कुलीन] .

 3. (INDRIDAMAN-इन्द्रिदमन) [अपनी आत्मा पर नियंत्रण रखनेवाला]

4. (SHRUT-श्रुत) [उसकी ओर वह्य की जाएगी].

 5. (PRAKRAM-प्रक्रम) [बलवान, मज़बूत].

 6. (ABHU BHASHITA-अभु भाषिता) [अल्पभाषी].

 7. (DAN-दान) [दानशील].

8. (KRITAGYATA-कृतज्ञता) [उपकार के प्रति आभारी].

यह हमारे नायक मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के उन गुणों और विशेषताओं का कुछ अंश है जिनको आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को जाननेवाले सभी अरब के लोगों ने स्वीकारा है, चाहे वे इस्लाम में प्रवेश किए हों या अपनी नास्तिकता पर बने रहे हों।

5- ''वह घोड़े की सवारी करेगा, उससे प्रकाश निकलेगा। उसके प्रताप और सुंदरता की कोई समानता नहीं कर सकता। वह खत्ना किया हुआ होगा, लाखों अत्याचारियों और नास्तिकों को फांसी देगा।’’ [भागवत पुराण 12-2-20],

हिन्दुओं के यहाँ खत्ना नहीं होता है, बल्कि वह मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की उम्मत (अनुयायियों) के पुरूषों का एक इस्लामी कर्तव्य है।

6- ''वह अपने चार साथियों की मदद से शैतान का नाश करेंगे, और स्वर्गदूत (फरिश्ते) उनकी लड़ाइयों में उनका सहयोग करने के लिए धरती पर उतरेंगे।’’ [कल्कि पुराण 2/5-7].

हमारे पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के चार साथी, वे खुलफा-ए-राशेदीन हैं जिन्हों ने आपके बाद शासन किया और इस्लाम के विद्वानों की इस बात पर सर्वसहमति है कि वे हमारे पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के बाद सबसे अच्छे मानव हैं।

7- ''वह अपने जन्म के बाद पहाड़ पर जायेंगे ताकि परशुराम [अर्थात महान शिक्षक]से शिक्षा प्राप्त करें। फिर वह उत्तर की ओर जायेंगे, फिर वह अपने जन्मस्थान की ओर वापस लौट आयेंगे।’’ [कल्कि पुराण].

नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम इसी तरह थे, आप हिरा नामी गुफा में एकांत में रहा करते थे यहाँ तक कि जिब्रील अलैहिस्सलाम आपके पास वह्य लेकर आए। फिर आप ने उत्तर की दिशा में मदीना मुनव्वरा की ओर हिजरत किया, फिर आप एक विजेता के रूप में मक्का वापस आए।

8- ''लोग उसके शरीर से निकलने वाले सुगंध से मुग्ध हो जाएंगे। उसके शरीर का पवित्र सुगंध हवा में मिश्रित होकर, आत्माओं और मनों को कोमल करदेगा।’’  [भागवत पुराण 2/2/21].

9- ''सबसे पहले जिसने वध किया और बलिदान दिया वह अहमदू है, तो वह सूर्य के समान हो गया।’’ [साम वेद 3/6/8].

10- ''एक आध्यात्मिक शिक्षक अपने सम्मानित साथियों के साथ आएगा, और लोगों के बीच महामद के नाम से प्रसिद्ध होगा। राजकुमार उसका यह कहते हुए स्वागत करेगा : ऐ रेगिस्तान के निवासी! शैतान को पराजित करनेवाले, चमत्कार वाले, हर बुराई से पवित्र, सत्य पर स्थापित, अल्लाह के ज्ञान में दक्ष, उससे प्यार करनेवाले, तुझे सलाम (तुझ पर अल्लाह की शांति हो), मैं आपका दास हूँ, मैं आपके पैरों के नीचे जीता हूँ।’’

[भविष्य पुराण 3/3/5-8].

11- ''इन चरणों के दौरान, जब मानव जाति के लिए सामूहिक भलाई के प्रकट होने का समय आ जाएगा, तो सत्य आगे बढ़ जाएगा, और (मुहम्मद) के प्रकट होन से अंधकार मिट जाएगा, और समझ और ज्ञान का प्रकाश उदय होगा।'' [भागवत पुराण 2/76].

इन ग्रंथों में स्पष्ट रूप से (मुहम्मद) या (अहमद) के नाम का उल्लेख किया गया है, और यह दोनों आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के नामों में से हैं। अल्लाह तआला का कथन है :

﴿وَمُبَشِّرًا بِرَسُولٍ يَأْتِي مِنْ بَعْدِي اسْمُهُ أَحْمَدُ ﴾ [الصف : 4]

''और एक रसूल की शुभ सूचना देता हूँ जो मेरे बाद आएगाए उसका नाम अहमद होगा।'' (सूरतुस-सफ : 6).

12- ''अग्नि देवी उज्जवल क़ानूनों वाली, हमने तुझे धरती के ऊपर बलिदान पेश करने के लिए बनाया है।’’ [ॠग्वेद 3,29,4].

13-  ''तथा [अथर्ववेद] और [ॠग्वेद] में - विभिन्न और अनेक स्थानों पर - (नराशंस) [अर्थात् प्रशंसित मनुष्य]की शुभसूचना वर्णित है। उसके गुणों के वर्णन में आया है कि : वह पृथ्वी पर सबसे सुंदर व्यक्ति होगा, उसका प्रकाश घर घर में प्रवेश करेगा, वह लोगों को पापों और कुर्कमों से पवित्र करेगा। वह ऊँट की सवारी करेगा। उसकी बारह पत्नियाँ होंगी . . . हे लोगो ! सुनो, (नराशंस) का चर्चा बढ़ जाएगा . . .  (नराशंस) की प्रशंसा की जाएगी, वह 60,090 लोगों के बीच से हिजरत करेगा (विस्थापित होगा) . . . मैंने (महामहे) को एक सौ शुद्ध सोने के सिक्के, दस तस्बीहें, और तीन सौ घोड़े प्रदान किए हैं।’’

पैगंबर की जीवनी पर लिखी गई पुस्तकों में उपर्युक्त संख्या में आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की पत्यिों के नाम गिनाए गए हैं।

14- ''एक पवित्र चरित्र वाला व्यक्ति रात के अंधेरे में सिंध के राजा (राजा भूज) के पास आया और उससे कहा : हे राजा! आपका धर्म (आर्य धर्म) भारत में सभी धर्मों पर सर्वोपरि रखता है, लेकिन महानतम पूज्य के आदेश से, मैं एक ऐसे आदमी के धर्म को आधिपत्य प्रदान करूँगा जो हर पवित्र चीज़ को खाएगा, वह खत्ना किया हुआ होगा, उसके सिर पर लटकनेवाली लट या सिर पर बंधी हुई चोटी नहीं होगी, उसकी लंबी दाढ़ी होगी। वह एक बड़ी क्रांति पैदा करेगा। लोगों में अज़ान देगा। वह, सूअर के अलावा, हर पवित्र चीज़ खाएगा। उसका धर्म सभी धर्मों को मंसूख (निरस्त) कर देगा, हमने उनका नाम मुसलाई रखा है। महान पूज्य ने इस धर्म की उनकी ओर वह्य (ईश्वरीयवाणी) की है।’’ [भविष्य पुराण 3/3/3/23-27].

हम कहते हैं कि नमाज़ के लिए अज़ान देना, और सूअर के मांस से परहेज़ करना इस्लामी शरीअत के सबसे प्रमुख विशेषताओं में से है। और उसके माननेवालों का नाम (मुसलमान) है, (मुसलाई) नहीं है। लेकिन वे एक ही मूल वाले क़रीब शब्द हैं।

हम आपसे यह भी कहते हैं कि हिन्दू धर्म के सिद्धांतकारों के कथन के अपेक्षानुसार, आपके लिए इस्लाम धर्म की आस्थाओं को धारण करने और पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम द्वारा लाए हुए धर्म को अपनाने की अनुमति है ; क्योंकि - उनके दृष्टिकोण में - हिन्दू धर्म गैर-भेदभाव (अपक्षपात) और सत्य के खोज से विशिष्ट है, और यह आपके हिन्दुत्व को प्रभावित नहीं करेगा, चाहे आप अल्लाह में विश्वास रखें या न रखें। महत्वपूर्ण यह है कि आप सत्य के लिए अपनी तलाश जारी रखें।

भारतीय नेता ‘‘गांधी’’ का कहना है :

‘‘हिन्दू धर्म का यह सौभाग्य है कि उसका कोई प्रमुख सिद्धांत नहीं है। यदि मुझसे उसके बारे में प्रश्न किया जाए तो मैं कहूँगा कि : उसका सिद्धांत पक्षपात न करना और अच्छे ढंग से सत्य की खोज करना है। रही बात सृष्टिकर्ता के अस्तित्व में विश्वास रखने या न रखने की, तो यह दोनों समान हैं। और किसी हिन्दू आदमी के लिए यह ज़रूरी नहीं है कि वह सृटिष्कर्ता में विश्वास रखे। वह एक हिन्दू है, चाहे वह विश्वास रखे या विश्वास न रखे।’’

तथा उनका यह भी कहना है कि :

‘‘हिन्दू धर्म का सौभाग्य है कि वह हर सिद्धांत (आस्था) से अलग है। परन्तु वह अन्य धर्मों के सभी मौलिक बातों और प्रमुख सिद्धांतों को घेरे हुए है।’’ उनकी पुस्तक ‘‘हिन्दू धर्म’’ (HINDU DHARM) से समाप्त हुआ।
इसे मैंने डॉ. आज़मी की पुस्तक ‘‘दिरासात फिल यहूदिय्या वल मसीहिय्या व अदयानिल हिंद’’ (यहूदी धर्म, ईसाई धर्म और भारत के धर्मों का अध्ययन) (पृष्ठ 529-530) से उद्धृत  किया है।

अधिक जानकारी के लिए उत्तर संख्या : (126472) देखें।

आप इसे इस्लाम का अध्ययन करने, उसकी अच्छाइयों और विशेषताओं में विचार करने, और अन्य सभी धर्मों पर उसकी विशिष्टताओं को तलाश करने के लिए अपना प्रारंभिक बिंदु क्यों नहीं बना लेते। क्योंकि इस्लाम अपने पूर्ववर्ती सभी धर्मों को मंसूख करनेवाला है। और इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम, अपने पूर्व सभी ईश्दूतों और पैगंबरों की शुभसूचना हैं। यह मामला बहुत गंभीर और खतरनाक है। क्योंकि क़ुरआन करीम मोक्ष के पथ को केवल एकेश्वरवाद के धर्म, इस्लाम के मार्ग में सीमित करता है। अल्लाह सर्वशक्तिमान का फरमान है :

﴿وَمَن يَبْتَغِ غَيْرَ الإِسْلاَمِ دِيناً فَلَن يُقْبَلَ مِنْهُ وَهُوَ فِي الآخِرَةِ مِنَ الْخَاسِرِينَ  ﴾ [آل عمران : 85].

‘‘और जो व्यक्ति इस्लाम के सिवा कोई अन्य धर्म ढूंढ़ेगा, तो वह (धर्म) उससे स्वीकार नहीं किया जायेगा, और आखिरत में वह घाटा उठाने वालों में से होगा।’’ (सूरत आल-इम्रान : 85).

अधिक जानकारी के लिए प्रश्न संख्या : (175339) का उत्तर देखें।

और अल्लाह ही सबसे अधिक ज्ञान रखता है।

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